Friday, December 13, 2019

HDFC Bank ( Customer Service Point )



HDFC Bank ( Customer Service Point )


Services

HDFC Bank Saving & Current Account Opening Services

Fix and RD Deposit
2 Wheeler Loan
Car Loan
Money Transfer
Aadhar Payment,
Cash Withdrawal form ATM and Aadhar Card,
Pan Card
Electricity Bill
LIC Premium Payment
All Government Schemes 


बाबा डिजिटल सेवा ( BaBa Digital Sewa )

सिविल लाइन्स, शाही कटरा, विजया बैंक के सामने, देवरिया (उ0 प्र0 ) 274001 

Contact-     +91- 7408084386
Whatsapp- +91- 7408084386


PayTM KYC के लिए सम्पर्क करें





PayTM KYC के लिए सम्पर्क करें |


बाबा डिजिटल सेवा ( BaBa Digital Sewa )

सिविल लाइन्स, शाही कटरा, विजया बैंक के सामने, देवरिया (उ0 प्र0 ) 274001 

Contact-     +91- 7408084386
Whatsapp- +91- 7408084386

Thursday, May 24, 2018

Money Transfer Service



Services:-
Recharge
Money Transfer (Domestic)
AEPS ( Aadhar Enabled Payment System) 
Bill Payment Service
DTH Recharge 

Start your online Services at ZERO Cost.

Retailer/Agent Id activation in 2 Minutes after providing Documents.

For More Information Kindly contact on below Numbers-

Whatsapp - 7408084386
Email- realpay.money@gmail.com
Web- agent.realpay.co.in

Wednesday, August 5, 2015

God in India. आज भी धरती पर भगवान है I

आज भी धरती पर भगवान है..

1:-. "अमरनाथजी " में शिवलिंग अपने आप बनता है|
2:-. "माँ ज्वालामुखी" में हमेशा ज्वाला निकलती है|
3:-. "मैहर माता मंदिर" में रात को आल्हा अब भी आते हैं|
4:-. सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000 बम में से एक का ना फूटना|
5:-. इतने बड़े हादसे के बाद भी "केदारनाथ मंदिर" का बाल ना बांका होना|
6:-. पूरी दुनियां मैं आज भी सिर्फ "रामसेतु के पत्थर" पानी में तैरते हैं|
7:-. "रामेश्वरम धाम" में सागर का कभी उफान न मारना|
8:-. "पुरी के मंदिर" के ऊपर से किसी पक्षी या विमान का नI निकलना|
9:-. "पुरी मंदिर" की पताका हमेशा हवा के विपरीत दिशा में उड़ना|
10:-. उज्जैन में "भैरोंनाथ" का मदिरा पीना|
11:-. गंगा और नर्मदा माँ (नदी) के पानी का कभी खराब न होना|
12:-. उनाई (तापी) में 40° गर्म पानी 365 दिन जमींन से
निकलना जहा भगवान राम ने योगी के कुष्ठ रोग ठीक करने के लिए गर्म पानी बाण मार कर जमींन से निकाला था |
13.. भीमगोडा (सिवाना, बाङमेर ) जहा पांडव श्री भीम ने वनवास के समय माता कुंती को प्यास लगी तब पहाड़ को गोडा (घुटना) मारकर पानी निकाला था जहाँ आज भी 365 दिन अमृत समान पानी निकलता हैं । भले ही कितना भी अकाल हो, और भयंकर अकाल के दिनों में भी यह पानी बंद नही होता है।
14 चित्तोडगढ बाण माताजी मन्दिर मे आरती के वक्त त्रिशूल का अपने आप हिलना (कम्पन) करना भी एक जीता जागता चमत्कार है।

(अब जिसका मन करे "प्रभु" का नाम लेकर इस पोस्ट को शेयर
करता चले)।

जय बाबा सिद्धेश्वर  नाथ I
बोलिए बाबा सिद्धेश्वर  नाथ जी की....... जय।
जय श्री राम
जय माता दी

दोस्तो आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी हमे जरूर वताये और ज्यादा से ज्यादा शेयर करके अपने दोस्तो को भी पढवाये॥

आप हमारी साइट में सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं॥


Friday, July 31, 2015

ज्वाला देवी

जय माँ ज्वाला देवी

ज्वाला देवी मंदिर.....यहाँ पर मानी थी अकबर ने अपनी हार
हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा से 30 किलो मीटर दूर स्तिथ है ज्वालामुखी देवी। ज्वालामुखी मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। ज्वालामुखी मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवो को जाता है! इसकी गिनती माता के प्रमुख शक्ति पीठों में होती है। मान्यता है यहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी। यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहाँ पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है। यहाँ पर पृथ्वी के गर्भ से नौ अलग अलग जगह से ज्वाला निकल रही है जिसके ऊपर ही मंदिर बना दिया गया हैं। इन नौ ज्योतियां को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का प्राथमिक निमार्ण राजा भूमि चंद के करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने 1835 में इस मंदिर का पूर्ण निमार्ण कराया।
अकबर और ध्यानु भगत की कथा :-
इस जगह के बारे में एक कथा अकबर और माता के परम भक्त ध्यानु भगत से जुडी है। जिन दिनों भारत में मुगल सम्राट अकबर का शासन था,उन्हीं दिनों की यह घटना है। हिमाचल के नादौन ग्राम निवासी माता का एक सेवक धयानू भक्त एक हजार यात्रियों सहित माता के दर्शन के लिए जा रहा था। इतना बड़ा दल देखकर बादशाह के सिपाहियों ने चांदनी चौक दिल्ली मे उन्हें रोक लिया और अकबर के दरबार में ले जाकर ध्यानु भक्त को पेश किया।
बादशाह ने पूछा तुम इतने आदमियों को साथ लेकर कहां जा रहे हो। ध्यानू ने हाथ जोड़ कर उत्तर दिया मैं ज्वालामाई के दर्शन के लिए जा रहा हूं मेरे साथ जो लोग हैं, वह भी माता जी के भक्त हैं, और यात्रा पर जा रहे हैं।
अकबर ने सुनकर कहा यह ज्वालामाई कौन है ? और वहां जाने से क्या होगा? ध्यानू भक्त ने उत्तर दिया महाराज ज्वालामाई संसार का पालन करने वाली माता है। वे भक्तों के सच्चे ह्रदय से की गई प्राथनाएं स्वीकार करती हैं। उनका प्रताप ऐसा है उनके स्थान पर बिना तेल-बत्ती के ज्योति जलती रहती है। हम लोग प्रतिवर्ष उनके दर्शन जाते हैं।
अकबर ने कहा तुम्हारी बंदगी पाक है तो तुम्हारी देवी तुम्हारी भक्ती की इज्जत जरूर रखेगी नहीं तो क्या फायदा तुम्हारी बंदगी का? या तो तुम्हारी इबादत झूठी है या तुम्हारी देवी यकीन के काबिल नहीं ऐसा करते हैं तुम्हारे घोडे की गर्दन कटवा देते हैं तुम अपनी देवी से कह कर घोडे की गर्दन जुडवा लेना और फिर अकबर ने घोडे की गर्दन कटवा दी|
कोई उपाय ना देख ध्यानु भक्त ने अकबर से एक माह की अवधी का समय माँगा और घोडा और उसकी गर्दन सुरक्षित रखने को कहा अकबर ने ये माँग मान ली और यात्रा करने की इजाजत भी दे दीI

बादशाह से विदा होकर ध्यानु भक्त अपने साथियों के साथ माता के मंदिर में उपस्थित हुआ स्नान पुजन करने के पश्चात ध्यानु भक्त ने रात भर माता का जागरण किया और प्रात: काल आरती के समय ध्यानु भक्त ने माता से विनती की और कहा माता आप तो अंतर्यामी हैं आप सब जानती हैं बादशाह ने मेरी भक्ती को झूठा बताया है अब आप ही मेरी भक्ती की लाज रखें माता ने प्रसन्न होकर ध्यानु भक्त की लाज रख ली और घोडे की गर्दन जोड दी और घोडे को जिंदा कर दियाI

ये देखकर अकबर हैरान हो गया वो अपनी सेना को लेकर मंदिर पहुँच गयाI वहाँ पहुँच कर अकबर के मन में शंका हुई उसने अपनी सेना से कहकर सारे मंदिर में पानी गिरवाया और मंदिर में प्रज्वलित ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया पर ज्वाला नहीं बुझी तब जाकर अकबर ने हार मानी फिर अकबर ने माँ के मंदिर में (५० किलो ) सवा मन सोने का छतर चढाया पर माता ने उसकी भेंट स्वीकार नहीं की और वो छतर कीसी और ही धातु में बदल गया आज भी वो छतर माता के मंदिर में देखा जा सकता हैI
पास ही गोरख डिब्बी का चमत्कारिक स्थान :-
मंदिर का मुख्य द्वार काफी सुंदर एव भव्य है। मंदिर में प्रवेश के साथ ही बाये हाथ पर अकबर नहर है। इस नहर को अकबर ने बनवाया था। उसने मंदिर में प्रज्जवलित ज्योतियों को बुझाने के लिए यह नहर बनवाया था। उसके आगे मंदिर का गर्भ द्वार है जिसके अंदर माता ज्योति के रूम में विराजमान है। थोडा ऊपर की ओर जाने पर गोरखनाथ का मंदिर है जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना जाता है। कहते है की यहाँ गुरु गोरखनाथ जी पधारे थे और कई चमत्कार दिखाए थे। यहाँ पर आज भी एक पानी का कुण्ड है जो देख्नने मे खौलता हुआ लगता है पर वास्तव मे पानी ठंडा है।

ज्वालाजी के पास ही में 4.5 कि.मी. की दूरी पर नगिनी माता का मंदिर है। इस मंदिर में जुलाई और अगस्त के माह में मेले का आयोजन किया जाता है। 5 कि.मी. कि दूरी पर रघुनाथ जी का मंदिर है जो राम, लक्ष्मण और सीता को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण पांडवो द्वारा कराया गया था। ज्वालामुखी मंदिर  की चोटी पर सोने की परत चढी हुई है।